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नीतीश कुमार का एजुकेशन सफर: इंजीनियरिंग पढ़कर कैसे बने बिहार के सबसे प्रभावशाली नेता
- Reporter 12
- 14 Apr, 2026
Nitish Kumar के इस्तीफे की चर्चा के बीच उनके एजुकेशन और करियर की कहानी चर्चा में है। जानिए इंजीनियरिंग से राजनीति तक का पूरा सफर।
पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल के बीच Nitish Kumar एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे की अटकलों के बीच लोग न केवल उनके राजनीतिक फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन और खासकर शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ गई है। एक साधारण परिवार से निकलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने और फिर राज्य की राजनीति में दशकों तक प्रभाव बनाए रखने की उनकी कहानी अपने आप में एक मिसाल मानी जाती है।
नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। उनके पिता राम लखन सिंह एक आयुर्वेदिक चिकित्सक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़े रहे थे। घर का वातावरण सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ था, जिसका असर बचपन से ही उनके व्यक्तित्व पर पड़ा। प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों से पूरी करने के दौरान ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई से मजबूत हुई नींव
स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने Bihar College of Engineering में दाखिला लिया, जिसे आज National Institute of Technology Patna के नाम से जाना जाता है। यहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। यह शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उनके सोचने के तरीके को भी गहराई से प्रभावित किया। तकनीकी शिक्षा ने उन्हें समस्याओं को तार्किक ढंग से समझने और समाधान निकालने की क्षमता दी, जो आगे चलकर उनकी प्रशासनिक कार्यशैली में साफ दिखाई देती है।
नौकरी से समाज सेवा की ओर बढ़े कदम
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने Bihar State Electricity Board में काम शुरू किया। यहां उन्होंने बिजली व्यवस्था से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक अनुभव हासिल किए, लेकिन उनका मन लंबे समय तक नौकरी में नहीं लगा। समाज में बदलाव लाने की सोच ने उन्हें धीरे-धीरे राजनीति की ओर आकर्षित किया। यही वह दौर था जब उन्होंने तय किया कि वे केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि समाज के बड़े मुद्दों पर काम करेंगे।
जेपी आंदोलन से मिली राजनीतिक पहचान
नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की असली शुरुआत JP Movement से हुई। इस आंदोलन ने देशभर में नई राजनीतिक चेतना पैदा की और युवाओं को सक्रिय भूमिका निभाने का मौका दिया। उन्होंने Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में काम किया और यहीं से उनकी पहचान एक गंभीर और समर्पित नेता के रूप में बनी। इस आंदोलन ने उनके नेतृत्व कौशल को निखारा और उन्हें जनता के बीच मजबूत आधार दिया।
राजनीति में लगातार मजबूत होती पकड़
जेपी आंदोलन के बाद नीतीश कुमार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने धीरे-धीरे बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल में सड़क, शिक्षा, कानून व्यवस्था और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी, जो विकास और सुशासन को प्राथमिकता देता है।
आज क्यों चर्चा में है उनका शैक्षणिक सफर
वर्तमान में जब बिहार की राजनीति एक बार फिर बदलाव के दौर से गुजर रही है और उनके इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं, तब लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर वह शख्स कौन है, जिसने इतने लंबे समय तक राज्य की राजनीति को दिशा दी। ऐसे में उनका शैक्षणिक और व्यक्तिगत सफर एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
नीतीश कुमार का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मजबूत शिक्षा, स्पष्ट सोच और समाज के प्रति प्रतिबद्धता के साथ कोई भी व्यक्ति बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। इंजीनियर से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
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